गांव से राष्ट्र तक गौरव की गाथा डॉ.राजय कुमार बने देवांगन समाज के पहले संस्कृत पीएचडी

(कालाहीरा न्यूज़)

ग्राम कछार से राष्ट्रीय गौरव: डॉ. राजय कुमार ने संस्कृत में पीएचडी हासिल कर किया देवांगन समाज का नाम रौशन।
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के ग्राम कछार के सपूत डॉ. राजय कुमार देवांगन ने संस्कृत विषय में पीएचडी (विद्या-वारिधि) पूरी कर न केवल अपने परिवार और गांव, बल्कि पूरे देश में देवांगन समाज का नाम रोशन किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वे देवांगन समाज से संस्कृत में पीएचडी करने वाले पहले व्यक्ति हैं।

शोधकार्य पूर्ण करने के उपरांत उन्हें दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा ‘डॉक्टर’ की उपाधि से सम्मानित किया गया।
राजय कुमार देवांगन ने अपने शोध में संस्कृत भाषा एवं व्याकरण के महत्वपूर्ण आयामों पर गहन अध्ययन प्रस्तुत किया। उनके शोधकार्य को परीक्षकों द्वारा सराहना मिली तथा इसे विषय क्षेत्र में उपयोगी योगदान माना गया।
परिवार, गुरुजन एवं क्षेत्रवासियों ने इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए उन्हें शुभकामनाएँ दीं।

यह उपलब्धि वर्षों की कठिन साधना, अनुशासन और अडिग संकल्प का परिणाम है। सीमित संसाधनों और ग्रामीण पृष्ठभूमि के बावजूद डॉ. राजय कुमार ने भारतीय ज्ञान परंपरा, वैदिक संस्कृति और संस्कृत साहित्य की समृद्ध विरासत को आधुनिक अकादमिक मंच पर प्रस्तुत किया है। उनका शोध कार्य न केवल शोधार्थियों के लिए महत्वपूर्ण है बल्कि आने वाली पीढ़ियों को संस्कृत भाषा और शास्त्रीय परंपरा से जोड़ने का मार्ग भी प्रसस्त करेगा।

राजय कुमार देवांगन ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों एवं सहयोगियों को दिया। उन्होंने कहा कि संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा की मूल भाषा है और इसके संवर्धन-संरक्षण हेतु निरंतर कार्य करना उनका लक्ष्य रहेगा।
उनकी इस उपलब्धि से न केवल परिवार बल्कि ग्राम कछार सहित संपूर्ण क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

Kala Hira
Author: Kala Hira

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