(कालाहीरा न्यूज़ )
दीपका । कोयलांचल की शांत आबोहवा में 2 अक्टूबर की शाम जिस खूनी खेल ने सनसनी फैला दी थी, दीपकापुलिस ने आखिरकार उसका पर्दाफाश कर दिया है। गांधी जयंती के पवित्र दिन पंकज सिंह पर हुए कातिलाना चाकूबाजी के हमले से पूरा इलाका दहल उठा था। इस खौफनाक वारदात के बाद से ही पुलिस की साख दांव पर लगी थी। लेकिन मुखबिरों के बिछाए जाल और एस.आई. किशन कुमार की अगुवाई में पुलिस टीम ने आधी रात को संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ दबिश देकर दो सगे शिकारियों—पी. चंडी बाबू और शुभम जाधव को दबोच लिया है। पुलिस ने इनके पास से वारदात में इस्तेमाल किया गया वही चमचमाता धारदार चाकू भी बरामद कर लिया है, जिससे पंकज सिंह के खून से दिपका की जमीन लाल की गई थी।
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## 🖋️ संपादकीय दृष्टिकोण: “अपराध मुक्त कोयलांचल” के दावों की खुली पोल, अब न्याय की बारी
2 अक्टूबर जैसी संवेदनशील तारीख को, जब पूरा देश अहिंसा का संदेश याद कर रहा था,दीपका में सरेआम चाकूबाजी की यह घटना कानून-व्यवस्था के मुंह पर एक करारा तमाचा थी। पुलिस ने भले ही आरोपियों को सलाखों के पीछे भेजकर अपनी पीठ थपथपा ली हो, लेकिन जनता के मन में बैठा खौफ इतनी आसानी से दूर नहीं होने वाला।
यह घटना सीधे तौर पर काला हीरा क्षेत्र में पनप रहे अवैध नशे और बेखौफ घूम रहे असामाजिक तत्वों की ओर इशारा करती है। जब तक ऐसी हिंसक मानसिकता वाले अपराधियों के मन में कानून का खौफ पैदा नहीं होगा, तब तक कोई भी नागरिक सुरक्षित महसूस नहीं कर सकता। दिपका पुलिस की त्वरित कार्रवाई स्वागत योग्य है, लेकिन अब बारी न्यायपालिका की है। इन आरोपियों को इतनी सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई दूसरा अपराधी किसी निर्दोष पर चाकू उठाने की हिम्मत न कर सके। अपराधियों पर सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि ऐसा कड़ा प्रहार होना चाहिए कि कोयलांचल की शांति दोबारा कभी भंग न हो।








