कालाहीरा न्यूज/दीपका-कोरबा
देश की सबसे बड़ी कोयला खदानों (गेवरा-दीपका) के सीने पर बन रहा ओवरब्रिज अब विकास कम और विवाद का पुल ज्यादा नजर आने लगा है। दो साल से कछुए की रफ्तार से रेंग रहे इस निर्माण को लेकर अब ‘दादा भाई’ का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। नगर पालिका परिषद दीपका के दबंग पार्षद और पीआईसी मेंबर अरुणीश तिवारी ‘दादा भाई’ ने इस पूरे मामले को लेकर सीधे जिला कलेक्टर कोरबा के दरबार में लिखित दस्तक दे दी है।
शिकायत क्या है, ये तो एक बात है, लेकिन ठेकेदार कंपनी के कारनामे सुनकर आप भी कहेंगे— ‘वाह भाई! ठेका मिला तो क्या पूरी व्यवस्था ही जेब में रख ली?’
1. पेटी कांट्रैक्ट का ‘खेल’ और स्तरहीन क्वालिटी!
खबर है कि इस ओवरब्रिज के निर्माण का मुख्य जिम्मा सरकारी कंपनी ‘राइट्स’ (RITES) के पास है। लेकिन राइट्स साहब ने खुद पसीना बहाने के बजाय यह काम पेटी कांट्रैक्ट पर सौंप दिया ‘बालाजी कंपनी’ को। दादा भाई का आरोप है कि पिछले दो साल से जनता धूल फांक रही है, रास्ता जाम झेल रही है और कंपनी है कि सुधरने का नाम नहीं ले रही। मामला हाई कोर्ट तक हो आया, लेकिन कंपनी की कार्यप्रणाली में रत्ती भर बदलाव नहीं दिखा।
2. सड़क पर मलबा, राहगीरों की जान आफत में
थाना चौक बैरियर से लेकर रेलवे क्रॉसिंग (दीपका चौकी) तक का सफर इन दिनों किसी एडवेंचर स्पोर्ट्स से कम नहीं है। ठेकेदार ने मुख्य मार्ग को ही अपना यार्ड समझ लिया है। जहां मर्जी आई गिट्टी पलट दी, जहां मन किया रेत डंप कर दी। नतीजा? आए दिन गाड़ियां फिसल रही हैं, भीषण जाम लग रहा है और लोग अपनी जान हथेली पर रखकर पुल पार करने को मजबूर हैं।
3. सरकारी जमीन पर ‘अवैध’ ठिकाना!
इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प मोड़ आता है तहसील कार्यालय के पीछे ‘नागिन झांकी’ क्षेत्र में। आरोप है कि बालाजी कंपनी ने यहां की सरकारी जमीन पर ‘नागिन डांस’ करते हुए अवैध रूप से अपना पूरा का पूरा कैंप तान दिया है। जब जमीन का हिसाब मांगा गया, तो कंपनी की तरफ से भ्रामक दावे किए गए कि ‘साहब, हम तो किराया दे रहे हैं, अनुमति ली है।’ लेकिन दादा भाई ने जब सरकारी बही-खाता खंगाला, तो पता चला कि सरकार के खजाने में फूटी कौड़ी भी नहीं आई है! यानी पूरी तरह से ‘फ्री-फंड’ का कब्जा।
4. पुराना रिकॉर्ड भी ‘दागदार’: पहले लग चुका है 27 लाख का फटका
यह कोई पहली बार नहीं है जब इस ठेकेदार की मनमानी सामने आई हो। इससे पहले इसी कंपनी ने निर्माण की आड़ में दीपका नगर पालिका की संपत्तियों को तहस-नहस कर दिया था। तब प्रशासन ने डंडा चलाया था और क्षतिपूर्ति के रूप में इनसे 27 लाख रुपये की भारी-भरकम रिकवरी की गई थी। लेकिन कहते हैं न कि ‘लातों के भूत बातों से नहीं मानते’, जुर्माना भरने के बाद भी कंपनी के तेवर जस के तस हैं।
अब आगे क्या? ‘दादा भाई’ की दो टूक
पार्षद अरुणीश तिवारी ‘दादा भाई’ ने कलेक्टर से साफ कह दिया है कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है। एक हाई-लेवल जांच टीम बनाई जाए, जो ब्रिज की क्वालिटी चेक करे, सरकारी जमीन को इस अवैध कब्जे से मुक्त कराए और सड़क पर बिखरा मलबा तुरंत हटवाए। दादा भाई ने दो टूक चेतावनी दी है— अगर इस लापरवाह ठेकेदार पर तुरंत सख्त और दंडात्मक कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो फिर जनता को साथ लेकर सीधे मैदान में उतरा जाएगा।
अब देखना यह है कि कोयलांचल की इस बड़ी समस्या पर कोरबा कलेक्टर का ‘बुलडोजर एक्शन’ कब शुरू होता है!








