दीपका में उमड़ा श्रद्धा का जनसैलाब, जीवंत झांकी के साथ धूमधाम से मना रुक्मणी विवाह

(कालाहीरा न्यूज)

दीपका। कोयलांचल नगरी दीपका में आयोजित संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के पांचवें दिन मंगलवार को कथा स्थल पर आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। सुप्रसिद्ध छत्तीसगढ़ी भागवत प्रवक्ता पंडित कामता प्रसाद शरण जी महाराज के मुखारविंद से भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के विवाह का प्रसंग सुनकर पंडाल में मौजूद लगभग एक हजार  श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।महाराज जी ने रुक्मणी विवाह की दिव्य व्याख्या करते हुए कहा कि रुक्मणी साक्षात लक्ष्मी जी का अवतार हैं और उनका भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम जीवात्मा और परमात्मा के मिलन का प्रतीक है। उन्होंने दीपका और आसपास के क्षेत्रों से आए हजारों श्रोताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जब जीव पूर्ण समर्पण के साथ परमात्मा को पुकारता है, तो भगवान सभी बंधनों को तोड़कर उसे अपनाने चले आते हैं। महाराज जी के छत्तीसगढ़ी बोली के अनूठे प्रवाह और भजनों ने पंडाल में उपस्थित भारी भीड़ को मंत्रमुग्ध कर दिया।विवाह की जीवंत झांकी पर झूमे हजारों श्रद्धालुकथा के दौरान जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी के विवाह का प्रसंग आया, पूरा पंडाल ‘जय कन्हैया लाल की’ और ‘राधे-राधे’ के जयकारों से गूंज उठा। इस अवसर पर विशेष रूप से सजाई गई विवाह की जीवंत झांकी प्रस्तुत की गई। दूल्हे के रूप में सजे भगवान श्रीकृष्ण और माता रुक्मणी पर श्रद्धालुओं ने फूलों की वर्षा की।

कालाहीरा न्यूज की ग्राउंड रिपोर्ट: आस्था का महासागर कालाहीरा न्यूज की टीम ने जब कथा स्थल का जायजा लिया, तो पैर रखने तक की जगह नहीं थी। कोयलांचल क्षेत्र के कोने-कोने से पहुंचे लगभग एक हजार  स्त्री, पुरुष और बुजुर्ग श्रद्धालु भगवान के इस दिव्य विवाह उत्सव के साक्षी बने। मंगल गीतों और गाजे-बाजे के साथ लोग झूमते-नाचते नजर आए। ऐसा लग रहा था मानो पूरा दीपका शहर ही द्वारिकापुरी में बदल गया हो। कथा के समापन पर महाआरती की गई, जिसमें हजारों भक्तों ने एक साथ दीप प्रज्वलित कर क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

Kala Hira
Author: Kala Hira

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *