(कालाहीरा न्यूज)
कोरबा/गेवरा: एशिया की सबसे बड़ी कोयला खदान कहे जाने वाले SECL गेवरा क्षेत्र से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ कर्मचारियों की सेहत का रखवाला कहा जाने वाला नेहरू शताब्दी चिकित्सालय (NCH) अब विवादों का केंद्र बन गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) की कार्यप्रणाली को लेकर कोयला मजदूरों में भारी आक्रोश है।
HMS ने खोला मोर्चा: “रेफर सेंटर” बनकर रह गया अस्पताल
कोयला मजदूर सभा के सचिव एस.सी. मंसूरी ने SECL गेवरा के महाप्रबंधक को पत्र लिखकर अस्पताल प्रबंधन की धज्जियाँ उड़ा दी हैं। मंसूरी ने सीधा आरोप लगाया है कि करोड़ों का बजट होने के बावजूद यह अस्पताल केवल एक ‘रेफर सेंटर’ बनकर रह गया है।
प्रमुख आरोप जो हिला देंगे प्रबंधन को:
- मेडिकल बिलों में धांधली: कर्मचारियों के जायज मेडिकल बिलों के भुगतान में जानबूझकर अड़ंगे लगाए जा रहे हैं।
- दवाइयों पर ‘अघोषित’ पाबंदी: अस्पताल में जरूरी दवाइयों का टोटा है और बाहर से दवा लेने पर उनके खाली रैपर और पैकेट मांगे जा रहे हैं, जो कर्मचारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने जैसा है।
- अपनों पर मेहरबानी: CMO पर अपने चहेते कर्मचारियों को विशेष सुविधा देने और आम मजदूरों को कागजी कार्रवाई में उलझाने का गंभीर आरोप है।
- स्टाफ की भारी कमी: डॉक्टरों, नर्सों और टेक्नीशियनों की कमी के कारण एक्स-रे जैसी बेसिक सुविधाएं भी ठप हैं।
15 दिन का ‘अल्टीमेटम’ – वरना होगा चक्का जाम!
मंसूरी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर इन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ, तो अस्पताल के सामने उग्र धरना-प्रदर्शन और भूख हड़ताल की जाएगी। खदानों में टीबी, शुगर और एलर्जी जैसी बीमारियों से जूझ रहे मजदूरों के सब्र का बांध अब टूट चुका है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं?
क्या SECL प्रबंधन अपने बेलगाम अधिकारियों पर नकेल कसेगा? क्या गेवरा के मजदूरों को उनका हक और सही इलाज मिल पाएगा, या मामला बड़े आंदोलन की भेंट चढ़ेगा?
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