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काला हीरा एक्सक्लूसिव: “कोयले से रेलवे की तिजोरी भरता है कोरबा, पर यात्री सुविधाओं में हाथ खाली”, संसद में गूँजी सांसद ज्योत्सना महंत की आवाज़

( काला हीरा न्यूज़)

नई दिल्ली/कोरबा |छत्तीसगढ़ की ‘ऊर्जाधानी’  


कोरबा, जो अपने काले हीरे (कोयले) से पूरे देश को रोशन करती है और भारतीय रेलवे को सर्वाधिक राजस्व देने वाले क्षेत्रों में शुमार है, आज खुद अपनी बदहाली पर आंसू बहा रही है। रेलवे की बेरुखी और यात्री सुविधाओं की अनदेखी का यह मुद्दा एक बार फिर देश की सबसे बड़ी पंचायत यानी लोकसभा में गूँजा। 

कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्सना चरणदास महंत ने रेल मंत्रालय के अनुदानों की मांगों पर चर्चा के दौरान क्षेत्र की ज्वलंत समस्याओं को मुखरता से उठाया। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि रेलवे को कोरबा से लगभग 80% राजस्व माल ढुलाई से मिलता है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर यहाँ के यात्रियों को केवल “ठेंगा” दिखाया जा रहा है।

सांसद के भाषण के मुख्य बिंदु:

  • तैयार पिटलाइन, फिर भी सूना स्टेशन: सांसद ने सवाल उठाया कि जब कोरबा में रेलवे की पिटलाइन बनकर तैयार है, तो उसे शुरू करने में देरी क्यों? पिटलाइन शुरू न होने के कारण नई ट्रेनों की शुरुआत और विस्तार रुका हुआ है। 
  • मालगाड़ियों की गुलामी करती यात्री ट्रेनें: उन्होंने कटाक्ष किया कि रेलवे की प्राथमिकता केवल मालगाड़ियाँ हैं। मालगाड़ियों को रास्ता देने के लिए यात्री ट्रेनों को घंटों आउटर पर खड़ा कर दिया जाता है, जिससे आम जनता परेशान हो रही है। 
  • कोविड काल की बंद ट्रेनें: कोरोना काल के दौरान बंद की गई कई महत्वपूर्ण ट्रेनों और उनके ठहराव को अभी तक पूरी तरह बहाल नहीं किया गया है। सांसद ने इन ट्रेनों को तत्काल शुरू करने की मांग की। 
  • बजट में विशेष प्रावधान की दरकार: ज्योत्सना महंत ने स्पष्ट किया कि “जिस क्षेत्र से सबसे अधिक कमाई हो रही है, उसे वाजिब हक मिलना चाहिए।” उन्होंने बजट में कोरबा के लिए विशेष प्रावधान और लंबित रेल कॉरिडोर को जल्द पूरा करने की बात कही। 

“शहद जैसी स्पीच, विष जैसी नीतियां”

सांसद ने सरकार के बजट पर प्रहार करते हुए कहा कि बजट भाषण सुनने में तो शहद जैसा मीठा लगता है, लेकिन छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए रेलवे की नीतियां “विष” के समान साबित हो रही हैं। उन्होंने मांग की कि कोरबा स्टेशन को केवल कोयला लोडिंग पॉइंट न समझा जाए, बल्कि इसे एक आधुनिक यात्री जंक्शन के रूप में विकसित किया जाए। 

कोरबा की जनता अब यह उम्मीद लगाए बैठी है कि सांसद द्वारा उठाए गए इन बुनियादी मुद्दों पर रेल मंत्रालय कब संज्ञान लेता है और कब ‘ऊर्जाधानी’ के यात्रियों को ट्रेनों के लिए घंटों इंतजार से मुक्ति मिलती है।


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Kala Hira
Author: Kala Hira

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