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दीपका में उमड़ा श्रद्धा का जनसैलाब, पं.कामता प्रसाद शरण महाराज ने कहा- ‘मोह ही दुखों का मूल कारण, ध्रुव जैसी दृढ़ता से ही मिलेगी ईश्वरीय कृपा’

मनोज महतो

दीपका (कालाहीरा न्यूज)। कोयलांचल नगरी दीपका के मातृछाया दीपेश्वर मंदिर प्रांगण में इन दिनों भक्ति की अविरल गंगा बह रही है। जायसवाल परिवार द्वारा आयोजित इस भव्य संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के विशेष प्रसंग में सुप्रसिद्ध कथाव्यास पूज्यपाद कामता प्रसाद शरण जी महाराज ने ध्रुव चरित्र और जड़ भरत की दिव्य कथाओं का ऐसा जीवंत वर्णन किया कि पूरा पंडाल ‘जय श्री कृष्णा’ और ‘हरि ओम’ के जयकारों से गुंजायम हो उठा। महाराज श्री के मुखारविंद से अमृत वर्षा सुनने दीपका सहित आसपास के क्षेत्रों से हजारों श्रद्धालु मंदिर प्रांगण पहुंचे।

📌 ध्रुव चरित्र: ५ वर्ष के बालक की दृढ़ता से सीखें संकल्प शक्ति

कथा व्यास पीठ से प.कामता प्रसाद शरण जी महाराज ने ध्रुव चरित्र की व्याख्या करते हुए कहा कि भक्ति की कोई उम्र नहीं होती। महाराज श्री ने कहा:

“जब ५ वर्ष का एक छोटा बालक सौतेली माँ के कटु वचनों से आहत होकर, अपनी माता सुनीति के कहने पर सर्वस्व त्याग कर मधुवन की ओर निकल सकता है, तो हम सांसारिक दुखों से घबराकर भगवान को क्यों नहीं पुकारते? ध्रुव का संकल्प अचल था। आज के मानव को अपनी इच्छाओं को वश में कर ध्रुव जैसी अटूट आस्था और दृढ़ संकल्प अपनाने की जरूरत है, तभी जीवन में स्थिरता (ध्रुव पद) आएगी।”

📌 जड़ भरत कथा: एक हिरण के मोह ने राजा को बना दिया पशु, मोह ही बंधन है

इसके बाद महाराज श्री ने जड़ भरत की मर्मस्पर्शी कथा सुनाकर पंडाल में उपस्थित श्रद्धालुओं को भावुक कर दिया। उन्होंने समझाया कि भक्ति मार्ग में ‘मोह’ सबसे बड़ा रोड़ा है। महाराज श्री ने उद्घोष करते हुए कहा:

“चक्रवर्ती सम्राट राजा भरत, जिन्होंने भगवान के लिए राजपाठ छोड़ दिया, वे केवल एक हिरण के बच्चे के मोह में फंसकर अगले जन्म में हिरण बन गए। यह कथा हमें चेतावनी देती है कि संसार में रहते हुए कर्तव्य निभाएं, लेकिन किसी से ऐसा अंधा मोह न करें जो आपको ईश्वर से दूर कर दे। मन को हमेशा ‘जड़’ यानी संसार के प्रति उदासीन और परमात्मा के प्रति जागृत रखना ही सच्ची बुद्धिमानी है।”

महाराज श्री ने राजा रहूगण और जड़ भरत के संवाद का उदाहरण देते हुए कहा कि शरीर नश्वर है, केवल आत्मा ही सत्य है। इसलिए जात-पात और ऊंच-नीच का भेद भूलकर हर जीव में नारायण के दर्शन करने चाहिए।

🌟 ठेठ छत्तीसगढ़ी में भागवत अमृत: अपनी माटी की भाषा सुन गदगद हुए श्रोता

इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी और अनूठी विशेषता महाराज जी की कथा वाचन शैली बनी हुई है। पूज्य कामता प्रसाद शरण जी महाराज संपूर्ण कथा का पाठ अपनी ठेठ छत्तीसगढ़ी भाषा में कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ की पावन माटी में आयोजित इस कथा का आनंद जब श्रद्धालु अपनी सोंधी मातृभाषा में सुन रहे हैं, तो उनका उत्साह देखते ही बन रहा है।

व्यासपीठ से जब महाराज जी छत्तीसगढ़ी के चुटीले अंदाज, मुहावरों और लोक भजनों के माध्यम से आध्यात्मिक रहस्यों को समझाते हैं, तो श्रोता भाव-विभोर होकर झूम उठते हैं। पंडाल में मौजूद बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक में इस छत्तीसगढ़ी कथा पाठ को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि मातृभाषा में कही गई बात सीधे दिल में उतर रही है और ऐसा लग रहा है मानो साक्षात शबरी की भक्ति और छत्तीसगढ़ की संस्कृति एक हो गई हो।

🌸 जायसवाल परिवार की अनूठी भक्तिमय पहल

इस भव्य आध्यात्मिक आयोजन को दीपका में धरातल पर उतारने का श्रेय जायसवाल परिवार को जाता है। संतोष जायसवाल भारती जायसवाल एवं पुत्र क्षत्रेष व समस्त परिवार के सदस्यों ने मिलकर मातृछाया दीपेश्वर मंदिर प्रांगण को अद्भुत फूलों और लाइटिंग से सजाया गया है, जहां प्रतिदिन सैकड़ों भक्तों के लिए महाप्रसाद और सुगम दर्शन की व्यवस्था की जा रही है। जायसवाल परिवार के सदस्यों ने व्यास पीठ की आरती उतारकर दीपका क्षेत्र की खुशहाली और तरक्की की कामना की। आरती के दौरान पूरा परिसर शंखध्वनि और करताल ध्वनि से गूंज उठा।

Kala Hira
Author: Kala Hira

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