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SECL दीपका में भारी लापरवाही: सुवाभोंडी फेस में हैवी ब्लास्टिंग से ग्रामीण की मौत, सुरक्षा नियमों की उड़ी धज्जियां

(कालाहीरा न्यूज)

दीपका।साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की दीपका परियोजना से आज एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। सुवाभोंडी फेस खदान में प्रबंधन और सुरक्षा अधिकारियों की घोर लापरवाही ने एक ग्रामीण की जान ले ली। खदान में सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर की जा रही हैवी ब्लास्टिंग के कारण पत्थर छिटककर सड़क पर चल रहे ग्रामीण लखन पटेल को लगा, जिससे उनकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार, आज दोपहर सुवाभोंडी फेस में कोयला उत्खनन के लिए हैवी ब्लास्टिंग की जा रही थी। नियमों के मुताबिक, ब्लास्टिंग के समय एक निश्चित दायरे (डेंजर जोन) को खाली कराया जाना अनिवार्य है और सड़क पर आवाजाही रोक दी जानी चाहिए। लेकिन प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि प्रबंधन ने बिना किसी पुख्ता सुरक्षा इंतजाम और चेतावनी के ब्लास्टिंग कर दी।

इसी दौरान वहां से गुजर रहे ग्रामीण लखन पटेल ब्लास्टिंग की चपेट में आ गए। ब्लास्टिंग के बाद पत्थर इतनी तेजी से छिटका कि वह सीधे लखन पटेल के ऊपर जा गिरा। चोट इतनी गंभीर थी कि उन्होंने मौके पर ही दम तोड़ दिया।

सुरक्षा नियमों का उल्लंघन

ग्रामीणों में इस घटना को लेकर भारी आक्रोश है। आरोप है कि दीपका परियोजना में सुरक्षा नियमों का लगातार उल्लंघन किया जा रहा है। ब्लास्टिंग के दौरान न तो सायरन का सही इस्तेमाल किया गया और न ही सुरक्षा गार्डों को सड़क पर तैनात किया गया ताकि राहगीरों को रोका जा सके।

प्रबंधन पर उठ रहे सवाल

इस दर्दनाक हादसे ने SECL के सुरक्षा अधिकारियों और खदान प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं:

  1. जब ब्लास्टिंग होनी थी, तो मार्ग को सुरक्षित क्यों नहीं किया गया?
  2. सुरक्षा अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद इतनी बड़ी चूक कैसे हुई?
  3. क्या भारी मुनाफे के चक्कर में ग्रामीणों की जान को जोखिम में डाला जा रहा है?

ग्रामीणों का प्रदर्शन

हादसे के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। परिजनों और ग्रामीणों ने मुआवजे और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया है। पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच चुकी है, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है।

इस घटना ने एक बार फिर कोयला खदानों में सुरक्षा ऑडिट की जरूरत को रेखांकित कर दिया है। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और DGMS (खान सुरक्षा महानिदेशालय) इस गंभीर लापरवाही पर क्या दंडात्मक कदम उठाते हैं।

Kala Hira
Author: Kala Hira

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