मनोज महतो
दीपका (कालाहीरा न्यूज)। छत्तीसगढ़ी सिनेमा अब अपनी सीमाओं को लांघकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की तैयारी में है। कोयला खदानों से प्रभावित लोगों के जीवन, उनके संघर्ष और उनकी अनूठी जीवनशैली को बड़े पर्दे पर उतारने के लिए फिल्म ‘खदान’ की शूटिंग इन दिनों कोयलांचल की हसीन वादियों में जोरों-शोरों से चल रही है।
प्रेम कहानी के जरिए दिखेगा आदिवासियों का जीवन
फिल्म के निर्देशक विश्वेष शेरावत जी ने मानिकपुर डैम के पास चल रही शूटिंग के दौरान पत्रकारों से खास चर्चा की। उन्होंने बताया कि ‘खदान’ केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि आदिवासियों के जीवन का एक जीवंत चित्रण है। यह फिल्म एक संजीदा प्रेम कहानी पर आधारित है, जो दर्शकों को आदिवासी समाज के आचार-विचार और उनकी संस्कृति से रूबरू कराएगी।
दो भाषाओं में रिलीज होगी ‘बड़े बजट’ की यह फिल्म
निर्देशक शेरावत, जिन्हें पूर्व में उनकी शॉर्ट फिल्मों के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं, इस बार एक बड़े विजन के साथ मैदान में हैं। उन्होंने बताया कि:
- यह एक बड़े बजट की फिल्म है।
- इसे छत्तीसगढ़ी और हिंदी, दोनों भाषाओं में एक साथ रिलीज किया जाएगा।
- उनका मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ी सिनेमा और भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाना है।
मानिकपुर डैम की वादियों में हो रही शूटिंग
फिल्म की दृश्यता और कहानी की मांग को देखते हुए इसकी शूटिंग दीपका क्षेत्र के आसपास और मानिकपुर डैम के प्राकृतिक लोकेशंस पर की जा रही है। फिल्म की टीम स्थानीय परिवेश को बारीकी से पर्दे पर दिखाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।
अपनी उत्कृष्ट तकनीकी और प्रभावशाली कहानी के दम पर ‘खदान’ आने वाले समय में छत्तीसगढ़ी फिल्म इंडस्ट्री के लिए एक मील का पत्थर साबित हो सकती है





