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कोयलांचल के सबसे बड़े संगठन में ‘संवैधानिक तख्तापलट’, मजदूरों के हक पर भारी पड़ा ‘मोह’!

(कालाहीरा न्यूज)
कोरबा/गेवरा-दीपका |
कोयला मजदूरों की आवाज बुलंद करने वाली कोयला मजदूर सभा (HMS) आज अपने इतिहास के सबसे खराब दौर से गुजर रही है। गेवरा-दीपका क्षेत्र से उठी विरोध की चिंगारी ने अब दावानल का रूप ले लिया है। संगठन के भीतर लोकतांत्रिक मूल्यों को कुचलने और ‘परिवारवाद’ का साम्राज्य स्थापित करने के जो दस्तावेज सामने आए हैं, उसने पूरे कोयलांचल में हड़कंप मचा दिया है। सचिव रविन्द्र कुमार द्वारा पंजीयक को भेजे गए शिकायती पत्र ने महामंत्री नाथू लाल पाण्डेय की कार्यशैली पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं।
HMS बना ‘प्राइवेट लिमिटेड कंपनी’, योग्यता नहीं ‘सरनेम’ बना पैमाना
इस पूरे विवाद की जड़ में वह ‘पारिवारिक प्रेम’ है, जिसने संगठन के संविधान को ठेंगा दिखा दिया। शिकायती पत्र के अनुसार, महामंत्री नाथू लाल पाण्डेय ने संगठन को अपनी निजी जागीर की तरह इस्तेमाल करते हुए अपने तीन बेटों—देवांश पाण्डेय (उप महामंत्री), रामांशु पाण्डेय (मंत्री) और शिवांश पाण्डेय (कार्यकारिणी सदस्य) को महत्वपूर्ण पदों पर ‘पैराशूट लैंडिंग’ कराई है। इसके साथ ही अध्यक्ष के पुत्र को भी पद से नवाजा गया है। सवाल यह उठता है कि क्या कोयला खदानों की धूल और गर्मी में तपने वाले हजारों मजदूरों में एक भी ऐसा काबिल चेहरा नहीं था, जिसे इन पदों के योग्य समझा जाता? क्या संगठन अब केवल ‘पाण्डेय परिवार’ के हितों की रक्षा के लिए रह गया है?
संविधान की ‘सर्जरी’: 55 की जगह 71 सदस्यों का जमावड़ा
संगठन का संविधान किसी भी यूनियन की आत्मा होता है, लेकिन यहाँ उस आत्मा को ही लहूलुहान कर दिया गया। धारा 16(अ) स्पष्ट रूप से कहती है कि केंद्रीय कार्यकारिणी में 55 से अधिक सदस्य नहीं हो सकते। लेकिन सत्ता के मोह में अंधे होकर पंजीयक कार्यालय में जो ‘फार्म-ई’ जमा किया गया, उसमें 71 सदस्यों का उल्लेख है। यह न केवल नियम विरुद्ध है, बल्कि कानून की नजर में एक बड़ा फर्जीवाड़ा भी है। सूत्रों का कहना है कि यह ‘जम्बो कार्यकारिणी’ केवल इसलिए बनाई गई ताकि अपनों और करीबियों को उपकृत किया जा सके और संगठन पर अपनी पकड़ को ‘अवैध’ तरीके से मजबूत रखा जा सके।
चिरमिरी अधिवेशन: बिना वोटर लिस्ट के ‘अंधेरगर्दी’ का खेल
19 जनवरी 2026 को चिरमिरी में आयोजित त्रैवार्षिक अधिवेशन पर भी धांधली के गंभीर आरोप लगे हैं। आरोप है कि इस अधिवेशन में डेलिगेट्स (वोटर लिस्ट) तक जारी नहीं की गई। लोकतंत्र की दुहाई देने वाले नेताओं ने बंद कमरों में बैठकर अपनी मर्जी से पदाधिकारी चुन लिए। हद तो यह है कि अधिवेशन के तीन महीने बीत जाने के बाद भी आज तक ‘मिनट्स’ (कार्यवाही विवरण) सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। आखिर महामंत्री को किस बात का डर है? क्या मिनट्स जारी होने से उनके ‘पारिवारिक एजेंडे’ की पोल खुलने का भय है?
विरोध की आवाज पर ‘तालेबंदी’ और निष्कासन की धमकी
संगठन में अब संवाद नहीं, बल्कि ‘हुकुम’ चलता है। पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि यदि कोई जमीनी कार्यकर्ता या पदाधिकारी नियमों की बात करता है, तो उसे सीधे तौर पर “संगठन से बाहर निकालने” और “पद से हटाने” की धमकी दी जाती है। इस तानाशाही रवैये के कारण वर्षों से संगठन को सींचने वाले कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
क्या होगा अगला कदम?
सचिव रविन्द्र कुमार ने पंजीयक के साथ-साथ श्रम मंत्री और संगठन के शीर्ष नेतृत्व (HKMF) को भी पत्र भेजकर इस पूरी कार्यकारिणी को तत्काल भंग करने की मांग की है। अब सबकी निगाहें प्रशासन और पंजीयक की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि समय रहते इस ‘संवैधानिक डकैती’ को नहीं रोका गया, तो कोयला मजदूरों का इस ऐतिहासिक संगठन से भरोसा उठना तय है।
ब्यूरो रिपोर्ट
मुख्य बिंदु जो चर्चा में हैं:
9 बाहरी लोग: संविधान के अनुसार केवल 4 बाहरी लोग हो सकते हैं, लेकिन यहाँ संख्या 9 तक पहुँच गई है।
फर्जी जानकारी: पंजीयक कार्यालय को गलत और भ्रामक जानकारी देने का आरोप।
मजदूरों की अनदेखी: जमीन पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को कार्यकारिणी में जगह नहीं।

Kala Hira
Author: Kala Hira

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